Wednesday, 22 April 2015

EARTH DAY: पूरे 24 घंटे का नहीं होता एक दिन, ये हैं पृथ्वी से जुड़े MYTHS

क्या आप जानते हैं कि एक दिन पूरे 24 घंटे का नहीं होता, बल्कि 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड का होता है? ऐसा इसलिए क्योंकि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने में इतना ही वक्त लेती है और उसके घूमने की रफ्तार भी साल-दर-साल कम होती जा रही है। पृथ्वी से जुड़े ऐसे ही कई और मिथक भी हैं, जबकि हकीकत इनसे थोड़ी अलग है। dainikbhaskar.com आज आपको अर्थ-डे के मौके पर ऐसे ही मिथकों के बारे में बता रहा है। साथ ही जानिए, पृथ्वी के सामने क्या हैं मौजूदा खतरे?
क्या है अर्थ-डे?
अमेरिका में 1970 में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता लाने के लिए सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने अर्थ-डे की शुरुआत की। उन्होंने इसके लिए कई दिनों तक कैम्पेन चलाया था। नतीजतन 22 अप्रैल को पूरे अमेरिका में 2 करोड़ लोग सड़कों पर उतर आए। अब तक इस कैम्पेन से 184 देशों में 5000 एन्वायर्नमेंटल ग्रुप्स जुड़ चुके हैं।
क्या हैं पृथ्वी से जुड़े मिथक?
1. एक दिन में 24 घंटे होते हैं।
नहीं। एक दिन 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड का होता है। इतना ही समय पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने में लेती है।
2. धरती पर बिजली कभी-कभी ही गिरती है।
- नहीं। एक सेकंड में 100 बार या एक दिन में 86 लाख बार भी बिजली गिरती है।
3. पृथ्वी के 70 % हिस्से पर पानी है।
- पृथ्वी के Mass के 0.07 % और इसके वॉल्यूम के 0.4 % हिस्से पर ही पानी मौजूद है। 
 4. चांद न होता तो पृथ्वी पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
चांद नहीं होता तो दिन 6 से 8 घंटे का ही होता। एक साल में 365 नहीं, 1000 से 1400 दिन होते।
5. धरती पर सबसे ऊंचा पर्वत माउंट एवरेस्ट है। ऊंचाई 8850 मीटर है।
- माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई समुद्र स्तर से 8850 मीटर है। लेकिन पृथ्वी के केंद्र से अंतरिक्ष की दूरी देखें तो सबसे ऊंचा पर्वत इक्वाडोर का माउंट चिम्बोराजो है। इसकी ऊंचाई 6310 मीटर है।
पृथ्वी के सामने मौजूद खतरे
1. बढ़ती जनसंख्या
दुनिया की आबादी अभी 7.3 अरब है। 2025 तक यह 1 अरब और बढ़ जाएगी। 2050 तक 9.6 अरब हो सकती है। ऐसे में अगले 35 साल में 10 में से सिर्फ एक को ही भरपेट भोजन मिल पाएगा। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार 2020 तक भारत दुनिया का ऐसा देश होगा, जहां हवा, पानी, जमीन और वनों पर विकास की रफ्तार का सबसे ज्यादा दबाव होगा।

2. तपती धरती
ग्लोबल वॉर्मिंग का असर सबसे ज्यादा है। 20वीं सदी की तुलना में इस साल जनवरी से मार्च के बीच औसत तापमान 1.48F ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। 2014 अब तक का सबसे गरम साल था, 2015 भी इसी रास्ते पर बढ़ता दिख रहा है।

3. पिघलते-सिकुड़ते ग्लेशियर
वेस्ट कनाडा के ग्लेशियर 21वीं सदी के अंत तक 70% तक पिघल जाएंगे। पिछले 5 से 7 साल में अलास्का के करीब सभी ग्लेशियरों के पिघलने की दर दोगुनी हो गई है। हिमालय के ग्लेशियर भी पिघल रहे हैं। पिछले 50 साल में एवरेस्ट क्षेत्र में स्नोलाइन 180 मीटर तक कम हो गई है। यूरोपियन आल्प्स के ग्लेशियर्स 40 % तक और अफ्रीका के ट्रॉपिकल ग्लेशियर्स 70 % तक अपना सरफेस एरिया खो चुके हैं।

4. घटते जंगल
हर साल 1.8 करोड़ एकड़ जंगलों की कटाई हो रही है। यह पनामा जैसे देश के आकार के बराबर है। हर दिन 27 हजार पेड़ सिर्फ टॉयलेट पेपर बनाने के लिए काटे जा रहे हैं।

5. बढ़ती बंजर जमीन
क्लाइमेट चेंज के कारण दुनिया में हर साल 32 हजार किलोमीटर जमीन बंजर हो रही है। पृथ्वी का एक तिहाई हिस्सा आंशिक या पूरी तौर पर रेगिस्तान है। थार का रेगिस्तान हर साल औसतन 8 किलोमीटर बढ़ रहा है। इसकी वजह से 50 वर्ग मील खेती लायक जमीन हर साल अपनी उर्वरता खो रही है। 51 मिलियन वर्ग किमी समुद्री क्षेत्र पूरी धरती के महासागरों का पिछले 30 सालों में निर्जीव हो चुका है।

6. बढ़ता प्रदूषण
दुनिया में 40% मौतें पानी, हवा और मिट्टी के प्रदूषण से होती हैं। सिर्फ एयर पॉल्यूशन से हर साल 70 लाख लोगों की मौत हो रही है। साउथ-ईस्ट एशिया और वेस्टर्न पेसिफिक रीजन के देशों में एयर पॉल्यूशन सबसे ज्यादा है।

7. पानी का संकट
दुनिया में रोजाना 1 अरब लोगों को पीने लायक पानी नहीं मिल रहा, जबकि 2 अरब लोग साफ पानी को तरस रहे हैं। 2050 तक करीब 09 अरब लोग बिना पानी या कम पानी में गुजारा कर रहे होंगे। 2025 तक भारत के करीब 60% भूजल स्रोत पूरी तरह सूख चुके होंगे।
 
पृथ्वी के बारे में कुछ फैक्ट्स
- सूरज के अंदर 13 लाख पृथ्वी बराबर तारे समा सकते हैं।
- पृथ्वी के स्लो रोटेशन की वजह से 2015 एक सेकंड लंबा होगा।
- पेड़ों से पहले धरती पूरी तरह से विशाल मशरूमों से ढंकी हुई थी।
- सौर मंडल में पृथ्वी ही एक ऐसी जगह है, जहां पानी सॉलिड, लिक्विड, वेपर रूप में मौजूद है।
- पिछले 40 साल में धरती से 40 % जंगली जीव विलुप्त हो चुके हैं।
- इंसान द्वारा बनाई गईं 22 हजार वस्तुएं अर्थ प्लेनेट पर चक्कर लगा रही हैं।
- पृथ्वी का 40 % हिस्सा दुनिया के छह देशों में है।
- ब्रह्मांड की 100 से 300 टन धूल हर दिन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर रही है।
- पृथ्वी के केंद्र में पर्याप्त सोना है, जो 1.5 फीट की गहराई तक इसकी पूरी सतह को ढंक सकता है।
- दुनिया में हर साल 5 लाख भूकंप आते हैं। इनमें से एक लाख भूकंप सिर्फ महसूस किए जाते हैं जबकि 100 विनाशकारी होते हैं।
- पृथ्वी पर मौजूद सिर्फ 1% पानी ही इस्तेमाल करने योग्य है। 97% समुद्री जल है। 2% पानी आर्कटिक में जमा हुआ है।
- धरती पर हर साल 77 लाख लोगों का बोझ बढ़ जाता है।
- दुनिया के सबसे पुराने पेड़ की उम्र 46 हजार साल से ज्यादा है जो अमेरिका के ब्रिस्टलकोन पाइंस में है।
- ग्लास की एक बोतल को पूरी तरह नष्ट करने में 4 हजार से भी ज्यादा साल लगते हैं।

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